कर्तव्य पथ
कर्तव्य पथ
— एक प्रेरणादायक कविता
चलो चलें उस पथ पर साथी,
जहाँ न आराम, न विश्राम।
जहाँ हर मोड़ पर केवल हो,
कर्तव्य का हो प्रथम प्रणाम।
न देखो तुम बाधाओं को,
न सोचो क्या होगा अंजाम।
जो रखे विश्वास हृदय में,
कर लेता है हर काम।
पसीने की जो बूंद गिरे,
वो भी बन जाए इक वरदान।
कर्तव्य-पथ की धूल सदा,
होती सबसे बड़ा सम्मान।
चलो उठो, मत रुको कहीं,
हर क्षण हो संकल्प महान।
कर्तव्य से जो जुड़ा रहे,
जीवन उसका हो कल्याण।
मुकेश शर्मा विदिशा