कहने को दुनिया में हर कदम पर मेले है।
कहने को दुनिया में हर कदम पर मेले है।
फिर भी इस भीड़ में तमाम लोग अकेले है।
ना कोई खुशी है न ही गमगीन है
बस खामोश है और खुद में लीन है ।
कुछ सपने है जो अधूरे है
कुछ दर्द है जो पूरे पूरे हैं
कहने को दुनिया में हर कदम पर मेले हैं
फिर भी तमाम लोग अकेले है।
कोई गुस्से को पाल रहा है
कोई मन की ख्वाइशों को टाल रहा है
इस हालात में जीये तो कहां तक
इस बाज़ार में हर एक आदमी नीयत से ढोंगी फकीर है
बस वह खामोश है और खुद में लीन हैं।