बुद्ध हो लिए
बुद्ध हो लिए
पढ़ा जो बुद्ध का विचार, भाव बुद्ध हो लिए।
हमें लग रहा है जैसे, आज शुद्ध हो लिए।।
हृदय संताप मुक्त हुआ, खुद प्रबुद्ध हो लिए।
श्रेष्ठ का संकल्प मेरा, द्वन्द- युद्ध हो लिए।।
जन्म और निर्वाण हुआ, आज बुद्ध हो लिए।
सिद्धार्थ पुत्र रत्न जने, लगा रूद्ध हो लिए।।
माया ममता त्याग दिए, स्वच्छ दुग्ध हो लिए।
यशोधरा का मोह नहीं, सत्य मुग्ध हो लिए।।
निभाया पंचशील जहाँ, दुष्ट युद्ध हो लिए।
गृहस्थ को त्रिरत्न मिले जो, कौन क्रुद्ध हो लिए।।
स्वीकारें आर्य सत्य को, जो अशुद्ध हो लिए।
अंगुली माल बदल गया, तभी बुद्ध हो लिए।।
रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्राथमिक विद्यालय भेड़हरिया इंगलिश पालीगंज पटना।
संपर्क – 9835232978