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16 May 2025 · 1 min read

सस्ता धंधा धर्म का - दोहा मुक्तक

सस्ता धंधा धर्म का, चलता चारों ओर।
पाप-पुण्य के नाम पर, यहाँ छलावा घोर।।
जनता भोली फँस रही, ऐसा बुनते जाल।
संत बने बैठे हुए, ठगते जैसे चोर।।

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