रहूँ सदा पुकारते
मापनी- 122-222-22, 1212-1212
शीर्षक– रहूँ सदा पुकारते
हमेशा दिल में हैं बसते, रहूँ सदा पुकारते।
खड़ा हूँ तेरे दर पर प्रभु, कमल नयन निहारते।।
कृपा कर तारें मुझको अब,नयन पलक बुहारती।
मिले माफी सब पापों की, मिटे सभी शरारती।।
हुई हो गलती मुझसे यदि, उसे न ध्यान दीजिए।
दिखे त्रुटि मेरे जीवन में, मुझे सतर्क कीजिए।।
जहाँ मुझमें कमजोरी हो, उसे भगा सँवारिये।
मिटे तृष्णा-माया मेरी, मुझे नहीं बिसारिये ।।
शरण में रख लें अपनी अब, कृपा असीम कीजिए।
रहूँ मैं सेवक बन हरपल, यही असीस दीजिए।।
सहारा प्रभु इकलौता हो, मुझे जरा दुलारिए।
पड़ूँ कोई संकट में तो, उसे अवश्य टारिए।।
नरेंद्र सिंह, 15.05.2025