नहीं नहीं कभी नहीं
शीर्षक– नहीं नहीं कभी नहीं
मिला सबकुछ जीवन में जो, त्रिदिव मुझे दिए यहीं।
नहीं भूला सकता प्रभु को, नहीं नहीं कभी नहीं।।
रहें जबतक साँसे मेरी, नमन इन्हें सदा करूँ।
धरा पर जब जब आयूँ तो, सदैव ध्यान मैं धरूँ।।
नहीं कोई ईश्वर जैसा, सहायता किया करे ।
बिना माँगे देते सबकुछ, सदैव ये रहे खरे।।
इन्हें कैसे भूला सकता, सदा भला मुझे किए।
यही करते पालन पोषण, प्रसिद्धि भी यही दिए।।
बने रह आभारी मानव, यही सदैव पालते।
सदा रहते रक्षक बन जो, सभी अनिष्ट टालते।।
नहीं कोई इनके जैसा, नहीं नहीं कभी नहीं।
रखो दिल में इनकी मूरत, तलाश मत करो कहीं ।।
नरेंद्र सिंह,16.05.2025