वही राधे वही श्यामा वही है शिव शक्ति का रूप अनूठा।
वही राधे वही श्यामा वही है शिव शक्ति का रूप अनूठा।
जिधर देखूं वही दिखे यही तो खेल हैं नजरों का निराला।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”
वही राधे वही श्यामा वही है शिव शक्ति का रूप अनूठा।
जिधर देखूं वही दिखे यही तो खेल हैं नजरों का निराला।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”