हम हों पंकज
///हम हों पंकज///
जग सद्-प्रीत भरा आधार सुनय हो,
प्रभु जीवन अपना सहज विनय हो।।
सबके चित्त और चितवन भी सुंदर,
विचार दृष्टि भाव सौम्य मधुमय हो।।
सदचारी मानव के चरण चूमती,
सत्य अरु धर्म की सदा विजय हो।
तन मन धन सब शुद्ध औ सुकृत,
अंत:करण कल्याणकरी हृदय हो।।
सब सुपंथ चलें शांति ध्येय हो,
मन में सर्वहित करुणा उदय हो।
प्रेम उज्जवल हों जिसके मोती,
सब व्यवहार निश्छल अभय हों।।
सर्व सुलभ प्रेम प्रणय मुक्ताहार,
सब सुंदर निरुज शतवय हों।
दया सिक्त दृगों में शांति निरंतर,
स्वर हमारे सुमधुर सुलय हों।।
जीवन में हम हों पंकज,
मन अभिमान घृणा तू तज।
प्रेम कर अखिल विश्व से,
तुम परम भावनिधी दिग्गज।।
स्वरचित मौलिक रचना
प्रो. रवींद्र सोनवाने ‘रजकण’ बालाघाट (मध्य प्रदेश)