दोहा त्रयी. . . . विविध
दोहा त्रयी. . . . विविध
बातें जो करता रहे, करे न कुछ भी काम ।
मिले कहाँ उस व्यक्ति को, जग में कोई नाम ।।
बिना लक्ष्य के जिंदगी, होती सदा फिजूल ।
जीना इसको कर्म से, मंत्र खुशी का मूल ।।
कदम नियंत्रण में नहीं, नहीं लक्ष्य का भान ।
कैसे होगा फिर उन्हें , मंज़िल का अनुमान ।।
सुशील सरना / 15-5-25