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15 May 2025 · 1 min read

दोहा त्रयी. . . . विविध

दोहा त्रयी. . . . विविध

बातें जो करता रहे, करे न कुछ भी काम ।
मिले कहाँ उस व्यक्ति को, जग में कोई नाम ।।

बिना लक्ष्य के जिंदगी, होती सदा फिजूल ।
जीना इसको कर्म से, मंत्र खुशी का मूल ।।

कदम नियंत्रण में नहीं, नहीं लक्ष्य का भान ।
कैसे होगा फिर उन्हें , मंज़िल का अनुमान ।।

सुशील सरना / 15-5-25

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