इसलिए लिखता हूँ मैं
मेरे गीतों से ही मेरा वजूद है,
ये ही मेरी जिंदगी है,
इन्हीं से मिलती है मुझको,
जिंदगी और ताकत जीने की,
इन्हीं से मिलती है मुझको,
उमंग, खुशी और शांति,
इन्हीं से मिलती है,
मुझको मंजिल की रोशनी,
इन्हीं से बनती है,
मेरे सपनों की तस्वीर,
इसलिए लिखता हूँ मैं।
इनसे अनुभव होता है मुझको,
दुःख में सुख का,
इन्हीं से मिलता है मुझको,
मलहम दिल के जख्मों का,
इन्हीं से मिलता है मुझको,
आंधी-तूफानों से निकलने का रास्ता,
इन्हीं में दिखता है मुझको,
आँसू से घिरी हुई आँखों में,
जोश से भरा चेहरा,
इसलिए लिखता हूँ मैं।
मैं कब क्या सोचता हूँ,
किसी के बारे में,
मेरा ईमान-मकसद क्या है,
मेरे जीवन के लिए,
मैं किसी से क्या उम्मीद करता हूँ,
दुनिया क्या है और मैं क्या है,
बता देना चाहता हूँ सच,
इसलिए लिखता हूँ मैं।
मैं वो सौदागर नहीं,
जो कि करता है सौदा,
गीतों और मोहब्बत का,
अपनी कलम और सोच का,
लोग मेरे जज्बात और प्यार को समझे,
जैसा कि उनके बारे में सोचता हूँ मैं,
सवालों के जवाब चाहता हूँ मैं,
सवालों के जवाब देना चाहता हूँ मैं,
और बन चुकी है एक आदत लिखने की,
इसलिए लिखता हूँ मैं।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)