नीरव में गुंजार सा
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कुछ शीतल मधुरिम अहसास सा
मन्द बयार का दिल को आभास सा ।
तेज तपन और जमी ठण्ड के बीच सा
कलरव करती चिडियों के गान सा ।
भोर सुनहले रंगे हुए आसमान सा
अंधकार बेधती रश्मि प्रकाश सा ।
निश्छल खिलखिलाती मुस्कान सा
प्रीत पगे नैनों के टकराव सा ।
शान्त नीर मे क्षणिक विक्षोभ सा
अहसास है तेरा नीरव में गुंजार सा ।
कविता मधुर