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15 May 2025 · 1 min read

“सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का

“सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का
यही तो वक़्त है सूरज तेरे निकलने का ,
यहां से गुजरे हैं, गज़रेंगे हमसे अहल-ए-वफ़ा
ये रास्ता नहीं परछाइयों के चलने का l”

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