एकांत
जिंदगी के चंद लम्हों से, क्षण चुराकर,
खुशियों के गुलाबो से पल ये सजाया है
समेट कर सवालों को रखा सिरहाने…..
और बेवजह मुस्कुराने का जरिया बनाया है
रख निजता का मान, गुरूता, दयालुता भी,
स्वाभिमान को ही आभूषण बनाया है
और छोड़ छल छंद, राग द्वेष, काम क्रोध सब,
जीवन एकान्त का मैनें अब अपनाया है।।