"लोगों को ना वाध्य करें "
डॉ लक्ष्मण झा परिमल
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साहित्य को ढूँढे तो विश्व के तमाम साहित्यों का समावेश फेसबूक के रंगमंचों पर मिलता है ! कविता और गीतों की शीतल फुहारों से सम्पूर्ण तन ,मन और हृदय शीतल हो जाता है ! कहानियाँ हमें जीवन के अनुभवों को बताते हैं ! लेखों के प्रज्वलित प्रकाश से नए- नए मार्ग प्रशस्त होते हैं ! हास्य,विनोद और व्यंग की चासनी से हमें गुदगुदी का एहसास होने लगता है कला,दर्शन,संस्कृति,सभ्यता,भाषा,इतिहास,रीति-रिवाज,राजनीति और भी कई आयाम इस रंग मंच की विविधता हैं ! इस रंगमंच में हरेक व्यक्ति अपने -अपने क्षेत्र में धनुर्धर हैं ! सारे सजग सचेष्ट महाभारत के अर्जुन हैं ! कुछ लोग ही नहीं अधिकांश ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने इस सैन्य संगठनों में अपना नामांकन तो करबा रखा है परंतु उन्हें कोई युद्ध प्रशिक्षण और युद्ध कला से कोई संबंध ही नहीं है ! सुनसान अंधेरे नेपथ्य में रहना उन्हें भाता है ! बस अपने जन्म दिनों में वे शुतुरमुर्ग बन जाते हैं ! कुछ भी हो फेसबूक रंगमंच के हम सभी महानायक हैं ! पर कुछ लोग इनमें ऐसे भी हैं जो अपने अभिनय को सबको दिखाना चाहते हैं ! पहले हमें यह सोचना होगा कि हमारे विषय में दर्शकों की अभिरुचि है या नहीं है ? शिक्षक को भी अपनी क्लास में monotonous (नीरसता) तोड़ने के लिए शिक्षण के विषय वस्तु को बदलने पड़ते हैं ! पर “MENTION,HIGHLIGHT,TAG,TAKE A LOOK”,इत्यादि वाले महारथी शायद ही बदल पाएँ ! पता नहीं उन्हें, लोगों को तंग करने से क्या मिलता है ? आप की प्रतिभा आपकी लेखनी में उभरेगी ! आप लोगों को कभी वाध्य ना करें !
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डॉ लक्ष्मण झा” परिमल ”
साउंड हेल्थ क्लिनिक
एस0 पी 0 कॉलेज रोड
दुमका
झारखंड
भारत
15.05.2025