चांदनी मादा खरगोश
चाँदनी मादा खरगोश
चाँदनी जैसी कोमल है,
नरम फुहार सी सौम्य है वह।
सफेद रुई सी प्यारी झलक,
भागे घर में इधर-उधर।
घर में बच्चों की जान है,
मेरे घर की पहचान है!
तारों से करती है बात,
चाँद संग बीते हर रात।
नन्हे पाँव, मन में होश,
वो है चाँदनी – मादा खरगोश।
मुकेश शर्मा विदिशा