चिंता इतनी न कर संसार की,
चिंता इतनी न कर संसार की,
निरंतर ये तो बढ़ती जाएगी,
चिंता न कर धन और दौलत की,
निरंतर ये ठहर नहीं पाएगी,
तू भी ठहरा हुआ कहाँ है,
समय के आड़े दिन गुजार रहा है,
तय करके तू भी आया है,
मरते समय सब यही छोड़ जाएगा।