इत्मीनान विराम है ही
समय का विराम,
कभी लगता नहीं जीवन में,
इत्मीनान होता है।
अधूरापन जीवन ढ़ोता,
कभी जीवन में विराम होता,
इत्मीनान होता वही।
कहानी होती पूरी,
अधूरी होती अल्पविराम होता वही,
इत्मीनान रखो यही।
विराम लगता एकदम,
एक दिन जीवन अनायास खोजता,
इत्मीनान मिले कहीं,
लौटा नहीं कोई,
आदि से अंत तक विराम लगाया,
इत्मीनान पाया तभी,
पूर्ण विराम मृत्यु,
वही है समय से परे,
इत्मीनान मुक्ति सही।
इत्मीनान है विराम,
विराम है पुनः नव निर्माण,
विराम सदैव इत्मीनान।
रचनाकार
बुद्ध प्रकाश
मौदहा हमीरपुर