दोहा त्रयी. . . . . वर्तमान
दोहा त्रयी. . . . . वर्तमान
जीवन में करना सदा, वर्तमान से प्यार ।
बीते कल से आज का, मत करना शृंगार ।।
वर्तमान के ग्रंथ में, जीवित तीनों काल ।
क्या जानें कब कौनसा, काल चलेगा चाल ।
बीते कल के पृष्ठ को, लिखता केवल आज ।
जीवन के इस में छुपे , जाने कितने राज ।।
सुशील सरना / 13-5-25