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14 May 2025 · 1 min read

दोहा त्रयी. . . . . वर्तमान

दोहा त्रयी. . . . . वर्तमान

जीवन में करना सदा, वर्तमान से प्यार ।
बीते कल से आज का, मत करना शृंगार ।।

वर्तमान के ग्रंथ में, जीवित तीनों काल ।
क्या जानें कब कौनसा, काल चलेगा चाल ।

बीते कल के पृष्ठ को, लिखता केवल आज ।
जीवन के इस में छुपे , जाने कितने राज ।।

सुशील सरना / 13-5-25

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