ख्वाबों में ही सही
ख्वाबों में ही सही
जब जब तुम करीब पाया है
धड़कनें दिल की ताल मिलाती रहीं
सांसों की खुशबू रातों रात महकाती रहीं
चाँदनी शब में तेरे होंठों की छुअन गुदगुदाती रही
उँगलियाँ उँगलियों को शिद्दत से थामती रहीं
तुम्हें पाने की यूँ तो कभी चाहत नहीं रही
जिन्दगी बेसबब नगमें गुनगुनाती रही
हिमांशु Kulshrestha