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14 May 2025 · 1 min read

सिन्दूरक महिमा

सिन्दूरक महिमा
(मैथिली कविता)

ओ भूकम्प किन्नहु नञ् छल
रिपु दर्प खसिकेऽ दरकल छल,
रावण दशमुखक अट्टहास पर
ब्रह्मास्त्र क’ शोला भड़कल छल..

वज्र बरसै जब,आकाश धरा पर
जेना घन गरजैय,बिजुरी चमकैय छल,
अंजनेय उड़ैय चहुंओर पवन गति,
सुदर्शन चक्र हरि, रक्षा कएने छल..

मेघनाद करएत रहैय यज्ञ दनादन
सरगोधा गिरि खोह म’ छिपकेऽ ‘बैठल ,
ऊँ ह्रीं क्लीं फट स्वाहा मंत्र पढ़ि ,
श्रीरामक सेना,जेना वज्र खसबय छल..

चूर चूर कऽ देलनि दर्प जब
धरती हिलि हिलि कऽ कांपय छल ,
कहैय राम ,सिन्दूरक महिमा त’ जानू
सिया हस्त म ‘एगो तृण, एटम छल..

कहैय राम ,सिन्दूरक महिमा त’ जानू
सिया हस्त म ‘एगो तृण, एटम छल..

ओ भूकम्प किन्नहु नञ् छल…

“मौलिक आ स्वरचित”
सर्वाधिकार सुरक्षित
© ® मनोज कर्ण
कटिहार ( बिहार )
तिथि – १४/०५/२०२५
ज्येष्ठ ,कृष्ण पक्ष,द्वितीया तिथि, बुधवार
विक्रम संवत २०८२
मोबाइल न. – 8757227201
ईमेल पता – mk65ktr@gmail.com

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