सुकून
दीवार पर टंगी
दादा जी की
तस्वीर ने पूछा
रहने वाले
घर के लोगों से
कैसे हो ?
कैसे क्या है
बस चिक चिक
सुबह से शाम तक
एक खाओ नौ की भूख
है पैसा पर न दिन में चैन
न रात में सुकून
दादा जी मुस्कुराये बोले
बेटा
कुछ और नहीं
बस जितना दिया है
भगवान ने
संतुष्ट रहो प्रसन्न रहो
उसी में जीवनभर
है यही सार
जीवन सार