बेखबर
कट रहें हैं वृक्ष चहुँ ओर
खत्म हो रहें हैं खेत , गॉव
सबको चाहिये पर
सड़क के पास वाला प्लाट
एक फ्लैट चौडी सडक वाला
सडक जिस पर लिखा होता है
वृक्ष लगाओ
एक पोस्टर पर ।
बह रहा है अन्धाधुंध पानी
नई तकनीकों के सहारे
आसान सी जिन्दगी के लिये
सबको चाहिये
टोंटी वो भी ज्यादा पानी देने वाली
उसी दीवार पर लगी
जिस पर लिखा है
जल है तो जीवन है।
हर तरफ फैली है पॉलिथीन
नदियों का प्रवाह रोकती
नालियों को जाम करती
मैदानों में पर्वतों की तरह
ऊँचा ढेर बनाये
सड़को के किनारे
दूर तलक फैली
जैसे दौड़ में
पीछे छोड़ना चाहती है सड़क को
वहां तक
जहाँ तक बोर्ड लगे हैं
उस पर स्वच्छता के ।
रास्तों में बेघर लोग
निम्न भू जल स्तर पर गाँव व शहर
हर तरफ बढ़ते गन्दगी के शोर
सबसे अनजान हम सब
सुन्दर तस्वीरों में निहारते खुद को
आत्म मुग्ध ।
कविता मधुर