जीवन मरण का प्रश्न हो जाता सखी
जीवन मरण का प्रश्न हो जाता सखी
होकर तथागत भी यदि
स्वामी नहीं गृह लौटते…
परिणाम फिर क्या था धरा..
निर्जीव ही थी यशोधरा.
जीवन मरण का प्रश्न हो जाता सखी
होकर तथागत भी यदि
स्वामी नहीं गृह लौटते…
परिणाम फिर क्या था धरा..
निर्जीव ही थी यशोधरा.