शीश झुकाता हूँ
दिए जो उपदेश बुद्ध ने उनको मैं अपनाता हूँ ।
मेरे लिए भगवान तुम्ही तुमको शीश झुकाता हूँ ।।
सत्य अहिंसा प्रेम के सदा रहे तुम पुजारी
मानव से मानव जोड़ा मानवता हितकारी
कर पाऊँ समर्पण जीवन मैं गीत यही गाता हूँ
मेरे लिए भगवान तुम्ही….
दिए जो पंचशील नियम उनका पालन करता हूँ
तुम्हारी शिक्षाओं पर चलकर जीवन दम भरता हूँ
जियो और जीने दो सबको बात यही बतलाता हूँ
मेरे लिए भगवान तुम्ही…
तुमने ही फरमाया था तुम बुराई को छोड़ देना ।
कर सको भला करो जीवन मे भलाई जोड़ लेना
मुश्किल वचन निभाना फिर भी वचन निभाता हूँ
मेरे लिए भगवान तुम्ही ….
चुन चुन कर काँटे जीवन के कितने जीव सँवारे थे
जो चल पड़े थे वचन सुनकर उनके जीवन निखरे थे
श्रद्धा भाव के भूखे तुम्ही तुमको शीश निभाता हूँ
मेरे लिए भगवान तुम्हीं …
डॉ अमित कुमार बिजनौरी
कदराबाद खुर्द
स्योहारा बिजनौर
उत्तर प्रदेश