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13 May 2025 · 1 min read

शायरी

लोगों की नीयत का अंदाजा लगाना
आज नामुमकिन सा हो गया है
एक चहरे पर हज़ारों चहरे लिए
घूम रहे हैं लोग

अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

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