शायरी
लोगों की नीयत का अंदाजा लगाना
आज नामुमकिन सा हो गया है
एक चहरे पर हज़ारों चहरे लिए
घूम रहे हैं लोग
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
लोगों की नीयत का अंदाजा लगाना
आज नामुमकिन सा हो गया है
एक चहरे पर हज़ारों चहरे लिए
घूम रहे हैं लोग
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम