शायरी
हुस्न का जादू, अब सर चढ़कर बोलता नहीं
गली – गली शहर – शहर, हुस्न का दीदार अब आम हो गया है l
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
हुस्न का जादू, अब सर चढ़कर बोलता नहीं
गली – गली शहर – शहर, हुस्न का दीदार अब आम हो गया है l
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम