माँ-बाप होना मतलब मालिक नहीं होना"
माँ-बाप होना मतलब मालिक नहीं होना”
बच्चों को समझो, गढ़ो मत,
उन्हें अपनी तरह जीने दो, डराओ मत।
प्यार की छांव में वो खिलते हैं,
डांट की धूप में नहीं, वो मुरझाते हैं।
पेरेंटिंग कोई आदेश नहीं,
ये साथ चलने की सुंदर कोशिश है।
जहाँ बच्चे पूछ सकें “क्यों?”,
और जवाब में उन्हें प्यार मिले, डर नहीं।
संवाद दो, भरोसा दो,
हर गलती पर साथ दो।
ताकि बच्चा कह सके —
“मुझे सुना गया”, “मुझे समझा गया