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13 May 2025 · 1 min read

जीती हुई बाज़ी हारे हुए हम किनारों पर बैठे हैं सब गवाए हुए ह

जीती हुई बाज़ी हारे हुए हम किनारे पर बैठे हैं सब गवाएं हुए हम।
सलीका ही नहीं कैसे सुलझाएंगे बेशुमार मसले ज़िंदगी के हम।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”

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