सरल नहीं है, किसी को समझना
किसी को समझ पाना भी, आसान नहीं होता किसी के लिए,
यूं तो लोग हरपल ही करते हैं, मनगढ़ंत बातें सभी के लिए।
समझना हो किसी को तो,
पढ़ना होगा उसकी रचनाओं को,
यदि वह लेखक ना हो तो,
पढ़ना होगा उसके शब्दों को,
अगर वह बातूनी ना हो तो ,
पढ़ना होगा उसके भावों को।
किंतु यदि समझना है किसी को,
तो उतरना होगा उसके अंतस्थल पर।
यह प्रक्रिया इतनी सरल तो नहीं है,
दूसरों को समझ पाना, इतना सहज भी नहीं है ।
चाहे तुम लाख किताबें पढ़ लो,
बेशक परीक्षाओं में भी उत्तीर्ण हो लो,
किंतु किसी के व्यक्तिगत जीवन को,
पढ़ लेना इतना सहज नहीं है।
उसके संघर्षों की गणना कर पाना,
भी इतना सहज नहीं है।
इसके लिए तुम्हे गहराई में उतरना होगा,
भावों के समंदर में गोता लगाना होगा,
चढ़ना होगा तुम्हे मन के उन भावों तक,
जहां अनंत आकाश की ऊंचाई है,
जहां अनंत कल्पनाएं हैं,
जहां अनंत जिज्ञासाएं है।
वहीं कहीं बीच एक मनुष्य खड़ा है,
सिर पर हाथ रखे, विचारों में लिप्त,
भविष्य के सुनहरे पन्नों को गढ़ने में,
अतीत की कुंठाओं से निकलने में।
इसे समझ पाना इतना सहज नहीं है।
यह प्रतिभा असाधारण है।
यह बिकती नहीं है बाजारों में,
यह धीरे-धीरे विकसित होती है,
तुम्हारे अंतरमन में ।
सहज नहीं है !
किसी के विषय में दो बातें कह देना,
सहज नहीं है किसी को न जाने बिना,
उसकी आलोचनाएं कर देना !
यह कार्य कठिन है।
इस कठिन कार्य को करने के लिए
अभ्यस्त होना जरूरी है।
तुम्हें लगेगा कि,
तुम दक्ष हो इस कार्य में किंतु
सावधान ! यह दिखाता सहज है,
उतना सहज भी नहीं है।
थक जाओगे तुम ,
मध्य में ही बिखर जाओगे,
धैर्य नहीं रख पाओगे,
फिर अपनी मनगढ़ंत कल्पनाओं,
को गढ़ने में व्यस्त हो जाओगे।
किंतु फिर भी तुम्हें लगेगा सक्षम हो,
दूसरों के विषय में दो शब्द कहने में ।
तुम कहते जाओगे, कहते जाओगे !
अपने फूहड़पन की छाप छोड़ते जाओगे ।
किंतु यह स्थिति हास्यास्पद होगी,
तुम्हारे लिए ,सभी के लिए।
बचो ऐसी स्थिति से,
किसी के विषय में,
दो शब्द बिना जाने,
बिना समझे कहने से।
दूसरों की आलोचनाओं में व्यस्त रहने वाले लोगों को समर्पित 🙏🙏