चलो माना कि,,"कश्यप" तुम मुकद्दर के सिकंदर हो।
चलो माना कि,,”कश्यप” तुम मुकद्दर के सिकंदर हो।
मगर इंसान हो तुम कुछ न कुछ तो खामियां होंगी।।
मुहब्बत का फसाना है इसे पर्दे में रहने दो।
जो पर्दा उठ गया तो खामखां बदनामियां होंगी।।
चलो माना कि,,”कश्यप” तुम मुकद्दर के सिकंदर हो।
मगर इंसान हो तुम कुछ न कुछ तो खामियां होंगी।।
मुहब्बत का फसाना है इसे पर्दे में रहने दो।
जो पर्दा उठ गया तो खामखां बदनामियां होंगी।।