जिस माँ का लाल शहीद हुआ
*(शेर)- कैसे गुजरी होगी रातें उस माँ की, जिसका लाल सरहद पर जंग में गया।
भारत माँ की आन की रक्षा करने में, जिन बच्चों का पिता युद्ध में गया।
क्या हाल होगा अब उस परिवार का, जिसका लाल जंग में शहीद हुआ।
जिस नारी का सिंदूर, शत्रु को मिट्टी में मिलाने ऑपरेशन सिंदूर में गया।।*
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पूछा किसने उस माँ का हाल, जिस माँ का लाल शहीद हुआ।
देखा किसने उस पत्नी का हाल, जिसका सुहाग शहीद हुआ।।
सलाम ऐसे सपूतों को, सलाम इन शहीदों को।—(2)
पूछा किसने उस माँ का हाल——————-।।
चल दिया वह लेकर आशीष, जब भारत माँ ने उसको पुकारा।
छोड़ फिक्र अपने घर की, दुश्मन को रण में उसने ललकारा।।
सोचा किसने उन बच्चों के लिए, जिनका पिता शहीद हुआ।
पूछा किसने उस माँ का हाल——————–।।
सलाम ऐसे सपूतों को, सलाम इन शहीदों को।–(2)
दुश्मन को चटाई उसने धूल, सिंदूर का बदला लेने के लिए।
खाई अपने सीने पर गोली, भारत माँ की रक्षा करने के लिए।।
कौन गया उससे मिलने, जिस बाप का बेटा शहीद हुआ।
पूछा किसने उस माँ का हाल———————।।
सलाम ऐसे सपूतों को, सलाम इन शहीदों को।–(2)
किसने किया शर्मसार सेना को, अपने निजी मतलब के लिए।
किसने बहाया खून भारत का, खुद की हस्ती, इज्जत के लिए।।
देखकर शव इन शहीदों के, कितनी आँखों से आँसू बहा।
पूछा किसने उस माँ का हाल——————–।।
सलाम ऐसे सपूतों को, सलाम इन शहीदों को।–(2)
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)