युद्ध विराम!
अमेरिकी राष्ट्रपति ने फरमाया,
मैने भारत पाकिस्तान का युद्ध विराम कराया,
फिर क्या था,
विधिवत घोषणा करायी गई,
जंग रुकवाई गई,
सभी स्तब्ध रह गये,
अभी तो शुरु हुवा था,
ऐसे कैसे रुक गया,
यह बताना आसान नही,
पर समझना है आसान,
सरपंच का था फरमान,
कैसे टाल सकते थे,
दोनों को मानना पडा,
चलो अच्छा हुआ,
रात नींद में तो कटेगी,
बिजली तो गुल ना रहेगी,
बाजारों में भिड बढने लगी,
रोजमर्रा के सामान की आमद घट रही थी,
अब सब सामान्य होने लगा है,
युद्ध में आखिर क्या रखा है,
एक ना एक दिन रोकना तो था,
जो हुआ अच्छा हुआ!
अब इस पचडे में क्या पड़ना,
कैसे रुका,किसने रुकवाया,
जिसने भी किया अच्छा करवाया,
अपनी सुख शांति लौट आई है,
उनसे पूछो क्या बित रही है,
रुश युक्रेन पिले पडे हैं,
युद्ध त्रासदी से हिले पड़े हैं,
इजराइल हमास को देख लो,
गाजा पट्टी का हाल देख लो,
खाना भी नसीब नहीं हो रहा है,
पानी पी ने को तरस रहा है,
उन्होंने न माना तो झेल रहे हैं,
श्रीमान ने कोई कोर,
कसर ना थोड़ी छोड़ी थी,
नहीं मानते तो उनकी मर्जी,
हमने मान ली तो नाक भौं क्यों सिकोड़ना,
क्या था उद्देश्य इस पचडे क्यों पडना,
खाओ पियो ऐस करो,
जिंदगी के मजे कैस करो!