हमने रखा सदैव खुद से ऊपर
हमने रखा सदैव खुद से ऊपर
अपने सम्बन्धों, कर्त्तव्यों, दायित्वों को।
फिर हुआ एक दिन यूँ कि
सारे सम्बन्धों, कर्त्तव्यों, दायित्वों के नीचे दबे
मेरे प्राण कसमसाने लगे।
सबने मुझे देख चुटहिल मेरी ही भलाई में
मुझे दर-बदर कर दरकिनार कर दिया।