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12 May 2025 · 1 min read

बचपन वाली जिंदगी

कुछ खो सा गया है जीवन से
शायद जिंदगी…….
हां वहीं जिंदगी जो हम दोस्तो के साथ
खुल कर किया करते हैं
मम्मी के डिब्बे से मिठाई चुराकर
कोने में छिपकर खाने वाली जिंदगी….
पापा से हर रोज कुछ न कुछ
फरमाइश वाली जिंदगी….
भाई बहनों का दिन भर झगड़कर
फिर एक दूसरे के लिए झगड़ने वाली जिंदगी
कॉलेज में teacher का favourite बनने की
होड़ वाली जिंदगी
या क्लासमेट्स की नाक में दम करने वाली जिंदगी
सब पीछे छूट गया…..
दोस्तों की शादियां हो गई …..
साथ खेलने वाले न जाने कहां गुम हो गए
कुछ यादें संजोकर रखी हैं
बस उनसे ही मन बहला लेते हैं
अब हम बड़े हो चुके हैं
इतने बड़े कि मन ही मन रोकर
फिर मुस्कुरा लेते हैं
……..साक्षी सिंह

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