करेली छोटी
करेली छोटी- यह धमतरी जिले में मगरलोड़ प्रखण्ड में स्थित एक गाँव है। वर्तमान में यहाँ की आबादी लगभग 6000 है। यह व्यवस्थित टाउनशिप का उदाहरण है, जिसमें 40-40 फीट चौड़ी दो मुख्य सड़कें तथा 20-20 फीट चौड़ी पाँच गलियाँ हैं। यह गाँव सन् 1958 में बसना शुरू हुआ। जिस परिवार में जितने बेटे थे, उतने प्लाट अलॉट हुए थे। प्रत्येक प्लाट 5-5 डिसमिल का था।
करेली छोटी में व्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम है। इस गाँव की अपनी प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था है। सड़क, नाली, भवन, बिजली के साथ गाँव की जरूरतों के हिसाब से आँगनवाड़ी एवं स्कूल भी है। ग्राम विकास समिति है, जो अपने बलबूते ही कई विकास कार्य कराती है। खरीफ और रबी दोनों सीजन में महानदी से लगी भूमि धान से लहलहाती है। प्रति एकड़ 30 से 40 क्विंटल धान के उत्पादन ने इस गाँव को समृद्ध और खुशहाल बना दिया है। बड़ी संख्या में पढ़-लिख कर युवा खेती कर रहे हैं।
मालगुजार दाऊ पवन ने सन् 1953 में भोपाल से इंजीनियर बुलाकर इस गाँव का मास्टर प्लान तैयार करवाया था। फिर 32 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहित कर किसानों को बदले में दूसरी जगह कृषि भूमि दी गई थी। पाँच वर्ष बाद सन् 1958 में गाँव बसना शुरू हुआ था। यहाँ के बाशिन्दे एक इंच भी शासकीय भूमि अतिक्रमण नहीं करते।
करेली छोटी गाँव में 16 जातियाँ मिल जुल कर रहती हैं। इसमें ब्राह्मण, बनिया, सतनामी, वैष्णव, राऊत, केंवट, गोड़, लुहार, सिदार, नाई, धोबी, नगारची, मुस्लिम इत्यादि है। कभी अनबन हो जाती है तो आपस में मामले सुलझा लेते हैं। यही वजह है कि न तो थाने में कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज है और न ही अदालत में कोई मामला। विवादों के निपटारे के लिए ग्राम विकास एवं सुरक्षा समिति गठित है। अध्यक्ष अपनी मर्जी से 7 से 15 सदस्य मनोनीत करता है। इसका फैसला सबको मान्य होता है।
करेली छोटी गाँव का जन-जीवन बेहतर, सुखी और समृद्ध है। यह ग्राम्य विकास का एक अनुकरणीय, आदर्श और अनुपम उदाहरण है।
डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति
( साहित्य वाचस्पति )
प्रशासनिक अधिकारी एवं
हरफनमौला साहित्य लेखक।