हां, पाकिस्तान 'सुसाइड मोड' में है?": अभिलेश श्रीभारती
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में सदी भर से चली आ रही तल्ख़ी अब एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहाँ ‘सीज़फायर’ शब्द भी केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया है। बीते चार दिनों की घटनाएँ बताती हैं कि पाकिस्तान की सेना और आतंकियों को भारत से मुंहतोड़ जवाब मिला है। ऐसा जवाब, जो न केवल सीमाओं पर उनके मंसूबों को ध्वस्त कर गया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उनकी छवि को तार-तार कर गया।
यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पाकिस्तान अब ‘सुसाइड मोड’ में प्रवेश कर चुका है। बार-बार की नाकाम कोशिशों, असफल घुसपैठ और सीमापार करवाई के बाद पाकिस्तान न तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहानुभूति पा रहा है और न ही अपने देशवासियों को बहलाने में सफल हो रहा है। इसीलिए अपने देश की मूर्ख लोगों को बहलाने फुसलाना के लिए वह झूठ के तहत प्रोपडेंडा फैला रहा है अमेरिका के पैरों में नखरा करने से लेकर तलवे चाटने तक भारत की ओर से सीजफायर की सहमति को जीत समझ कर जश्न मान रहा है और अपने देश भारत की नीति अब बिल्कुल स्पष्ट है—”यदि अब एक और हमला हुआ, तो उसे सीधे युद्ध की घोषणा माना जाएगा।”
वैसे भी भारत ने अपने नीति में बदलाव करते हुए कहा है कि अब किसी भी प्रकार की आतंकी हमला Act of war माना जाएगा और उसे सीधी सीधी युद्ध के चुनौती मानी जाएगी और भारत की ओर से उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।।
भारत अब उस पुराने युग में नहीं है, जब वह जवाब देने से पहले बार-बार सोचता था। अब भारत की नीति निर्णायक, ठोस और प्रतिकारक है। बीते दिनों की सैन्य कार्यवाहियों ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत न केवल तैयारी में श्रेष्ठ है, बल्कि मनोबल में भी अडिग और अपराजेय है।
पाकिस्तान को यह समझ लेना होगा कि छद्म युद्ध की नीति अब चलने वाली नहीं है। भारत की कूटनीतिक रणनीति, सीमावर्ती सतर्कता और आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक्स जैसे ठोस कदम यह दर्शाते हैं कि अब हर जवाब पत्थर से नहीं, तोप से मिलेगा।
यह स्थिति हमें एक गंभीर चिंता की ओर इशारा करती है—क्या दक्षिण एशिया एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है? क्या पाकिस्तान एक आखिरी दांव खेलने को तैयार हो रहा है, जिसे वह ‘शहादत’ कहता है और बाकी दुनिया ‘पागलपन’?
हां हां मैं इस पागलपन ही कहूंगा अमेरिका जैसे स्व घोषित मुखिया को।
भारत के लिए यह समय केवल सतर्क रहने का नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से आगे बढ़ने का भी है। देश की सुरक्षा नीति को और मजबूत करते हुए, वैश्विक सहयोग बढ़ाना और पाकिस्तान की नाकामियों को अंतरराष्ट्रीय पटल पर उजागर करना अब हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
सीज़फायर के कागज पर भले ही स्याही सूख गई हो, पर बंदूक़ें अभी भी गरम हैं। भारत ने साफ़ कर दिया है कि अब हर चुनौती का जवाब युद्ध स्तर पर ही दिया जाएगा। और यदि पाकिस्तान ने अपनी आदतें नहीं बदलीं, तो वह दिन दूर नहीं जब अगला युद्ध हमारी कल्पना से कहीं पहले दस्तक दे जाएगा।
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नोट: यह लेखक के अपने निजी विचार है।
✍️ आलेख साभार ✍️
अभिलेश श्रीभारती
सामाजिक शोधकर्ता, विश्लेषक, लेखक