माँ (ममता की मूरत)
” माँ ” शब्द पूरे संसार में ,
सबसे प्यारा,न्यारा शब्द है ,
इसी एक खूबसूरत शब्द के पीछे ,
सृष्टि का समस्त रहस्य छिपा है !
माँ शब्द गहन है , वृहद है, अर्थवान है ,
माँ जननी , वात्सल्यमयी है माँ ,
करूणामयी शक्ति, ऊर्जा है माँ,
पृथ्वी की कठोरता है माँ ,
गंगा की पवित्रता है माँ ,
प्रेम की प्रतिमूर्ति है माँ ,
शौर्य की अभिमूर्ति है माँ ,
ज्ञान की ज्ञाननेत्री है माँ ,
ममता की मूरत है माँ
सौन्दर्य की सूरत है माँ ।
कहते हैं ,
देवताओं और दानवों ने मिलकर ,
समुद्र का जब मंथन किया था तब ,
उसमें से अमृत का घड़ा निकला था ,
वहीं अमृत तो है माँ !
इस नर्क लोक धरती पर रहने वाले ,
अमृत को नहीं जानते ,
और न ही उसके मिठास को जानते हैं !
लेकिन इस धरती के पास ,
अमृत से भी बढ़कर कुछ है ,
तो वह है ” माँ ” !
हमने ईश्वर को तो नहीं देखा ,
लेकिन ईश्वरीय उपहार का ,
छोटा सा नाम है रुप है ,
वह है ” माँ ” !