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11 May 2025 · 1 min read

दोहा सप्तक. . . . . संबंध

दोहा सप्तक. . . . . संबंध

भौतिक युग के हो गए, भौतिक सब संबंध ।
ठहरे पानी सी लगे , इन में अब दुर्गन्ध ।।

फेरे लेकर अग्नि के, कसमें खाईं साथ ।
छोड़ दिया फिर अहम के,कारण अपना हाथ ।।

संबंधों में बेवजह, बढ़ने लगे तनाव ।
पल में रिश्ता तोड़ते, चाहें नहीं झुकाव ।।

संबंधों का टूटना, आज आम है बात ।
अब तलाक के शूल से, आहत है हर रात ।।

मनमुटाव इतने बढ़े , टूट गए संबंध ।
जीवन सूना हो गया, बिखरी पावन गंध

अवसर जीने के नहीं, मिलें कभी दो- चार ।
तोड़ अहम का झुनझुना, खुश- खुश इसे गुजार ।

गठबंधन के धर्म को, सदा निभाना यार ।
छोटी-छोटी बात को, मत देना विस्तार ।।

सुशील सरना / 11-5-25

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