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11 May 2025 · 1 min read

सावन

सावन

भीगा रहा जमीन का आँचल,
आया है हरियाली ले ये सावन।
इधर उधर बादल मेघा घूमते ,
रिमझिम रिमझिम बरसे सावन।

गलियों आँगन में बरसा है सावन,
पेड़ों को हरियाली लाया सावन।
पंछियों की चीव चीव क़ुहू क़ुहू है सावन,
हिरणों की उंची उड़ान है ये सावन।

मयूरी नाचने पंख लहराता सावन,
तितली भौरों की गुंजन में सावन।
रंग बेरंगी तरह तरह फूलों में सावन,
उपवन के साथ खेल खेलता है सावन।

मिट्टी के खुश्बू की महक है ये सावन,
बिती यादो का उजाला है ये सावन।
सागर नदियों में गहराता है ये सावन,
पवन के झोंको के साथ झूले ये सावन।

युवा युवतियों की अंगड़ाई है ये सावन,
हर प्रित के नगमो में बसा ये सावन।
किसी का इजहार किसी के इंतजार का सावन,
साजन सजनी बिन सूना है ये सावन।

कई हर्ष त्योहार का संगम है ये सावन,
किसानों की उम्मीदें हैं बरसता सावन।
भविष्य की आस जीने का अहसास है सावन,
आने वाले दिनों को रंगीन बनाता है सावन।

धरती के साथ हर जीव की हरियाली सावन,
बच्चों के नये ज्ञान की शुरुआत है ये सावन।
देश के कोने-कोने का गहन इंतजार ये सावन,
देश के हर प्रांत का उज्ज्वल भविष्य है सावन।

स्वरचित मौलिक अप्रकाशित
कृष्णा वाघमारे, जालना, महाराष्ट्र

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