कितने ख़ूबसूरत होते हैं
कितने ख़ूबसूरत होते हैं
वह लोग जो अगर रूठ जाएं
तो ख़ुद ही मान भी जाएं
उलाहना दें तो प्रेम भी जताएं
जिनके संग दास्तानें ख़ुद गढ़ जाएं
हम वही रहें जो हम हैं
झूठ – सच सही ग़लत के परे
एक पल के लिए ही सही
हों बस एक साथ, लिए हाथों में हाथ
सिर्फ़ साथ, बस साथ
हिमांशु Kulshrestha