मातृ दिवस
मेरी धरती माँ को आज
बधाई मातृ दिवस की
जननी जीवन दायिनी
तेरी मेरी हम सबकी
गोद में जिसकी हम खेले
बनाये मिट्टी के खिलौने
धूल भरे आँचल में लिपटे
देखे कई सपन सलोने
साथी फसलों की टोली
खूब खेली आँखमिचौली
संग पवन के हम झूले
झूले पत्ता झूली डाली
धैर्य धरा तुझसे सीखा
सीखा तपना औ खिलना
सीने से माँ तूने लगाया
हो मेरा उठना या गिरना
इस मिट्टी से ही गढ़े गए
धमनियों में है रक्त तेरा
तू आज होती लाल है
ये कैसे सहले लाल तेरा
है सौगंध कोई छू न सकेगा
न अरि न आपदा
है चमकता रहेगा तेरा
सिंदूर तिलकित भाल सदा
रेखांकन।रेखा
११.५.२५