Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
11 May 2025 · 1 min read

मातृ दिवस

मेरी धरती माँ को आज
बधाई मातृ दिवस की
जननी जीवन दायिनी
तेरी मेरी हम सबकी

गोद में जिसकी हम खेले
बनाये मिट्टी के खिलौने
धूल भरे आँचल में लिपटे
देखे कई सपन सलोने

साथी फसलों की टोली
खूब खेली आँखमिचौली
संग पवन के हम झूले
झूले पत्ता झूली डाली

धैर्य धरा तुझसे सीखा
सीखा तपना औ खिलना
सीने से माँ तूने लगाया
हो मेरा उठना या गिरना

इस मिट्टी से ही गढ़े गए
धमनियों में है रक्त तेरा
तू आज होती लाल है
ये कैसे सहले लाल तेरा

है सौगंध कोई छू न सकेगा
न अरि न आपदा
है चमकता रहेगा तेरा
सिंदूर तिलकित भाल सदा

रेखांकन।रेखा
११.५.२५

Loading...