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11 May 2025 · 1 min read

सोच समझकर बोल - कुण्डलिया

विषय- सोच समझकर बोल
छंद- कुण्डलिया

बोली तो अनमोल है, सोच समझकर बोल।
हृदय नहीं आघात दे, मधु-रस मन में घोल।।
मधु-रस मन में घोल, हरे विकार को भारी।
हृदय- द्वार को खोल, सदा हीं प्रेम विचारी।।
मधर वचन का रंग, चढ़े जैसे हो होली।
दुश्मन को ले जीत, बोलकर मीठी बोली।।

रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्राथमिक विद्यालय भेड़हरिया इंगलिश पालीगंज पटना।
संपर्क – 9835232978

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