रवीन्द्र नाथ टैगोर - विधाता छंद
रविन्द्र नाथ टैगोर जयंती
रचें जो राष्ट्र के थें गान जन-गण-मन सभी गाते।
कहानीकार, नाटककार, चित्रकार कवि भाते।
असाधारण सृजन कर्ता उन्हें बांग्ला सदा भाया।
प्रथम नोबेल का सम्मान जिनसे एशिया आया।।
मई की सात तारीख शुभता थी कोलकाता में।
अमर गीतांजलि महाकाव्य रचकर योग्यता थामे।
नहीं कोई मिला ऐसा जिसे हम गुरु बना पाए।
बुराई हो नहीं जिसमें हमारा मान बढ़ जाए।।
स्वदेशी भाव में रहकर किए वें काम थें सारे।
विदेशी भूमि भी गुरुदेव को मानें बहुत प्यारे।
रही संस्कृति जिन्हें प्यारी हमें है नाज भी जिसपर।
उन्हें हम याद करते हैं नमन श्रद्धा सुमन रखकर।।
रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्राथमिक विद्यालय भेड़हरिया इंगलिश पालीगंज पटना।
संपर्क – 9835232978