महाराणा प्रताप - मनहरण घनाक्षरी
महाराणा धीर थें – मनहरण घनाक्षरी
सिसोदिया राजवंश,
दिया मुगल को दंश,
उदय प्रताप अंश, महाराणा धीर थें।
मेवाड़ का नंदन,
करते वीर वंदन,
अकबर का क्रंदन, लिए शमशीर थें।
चेतक टाप धरता,
बात हवा से करता,
चार चाँद था लगता, बनें रणवीर थें।
वन्य जीवन बिताना,
घाँस-फूस वर्षों खाना,
हल्दीघाटी के रण में, दिए जो नजीर थें।
रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्राथमिक विद्यालय भेड़हरिया इंगलिश पालीगंज पटना।
संपर्क – 9835232978