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10 May 2025 · 1 min read

माँ - मनहरण घनाक्षरी

माँ – मनहरण घनाक्षरी

लेखनी सिसक रही,
शब्द नहीं लिख रही,
वर्णन संभव नहीं, नि:शब्द है भारती।
प्राण मान ज्ञान सर्व,
चरणों में सारे पर्व,
करते प्रभु भी गर्व, करें माँ की आरती।
पुण्य तीर्थ धाम धर्म,
जीवन में कोई मर्म,
योग्य श्रेष्ठ अन्य कर्म, धरा नहीं धारती।
सार प्यार धार चित,
पूज्य पाद नेह नित,
धन्य हैं बना जो भृत्य, सदा हीं माँ वारती।

रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्राथमिक विद्यालय भेड़हरिया इंगलिश पालीगंज पटना।
संपर्क – 9835232978

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