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10 May 2025 · 1 min read

चुटकी भरि सिंदूर

चुटकी भरि सिंदूर..
(मैथिली काव्य)

गौरी गजनी सभ पड़ले रहि जाएत
ब्रह्मोस मिसाइल क’ मारि सहब कोना,
चुटकी भरि सिंदूर केऽ कीमत,
प्रतिशोध बिना अहां जानब कोना..

ड्रोन बनल जेना दिवाली क’फुलझड़ी
बच्चा सभ चुनि खेलएयै घर-अंगना,
ई भारत आब निर्बल नञ् रहि गेल,
फूंकि मारि जे अहां करब जादू टोना..

चुटकी भरि सिंदूर के कीमत,
प्रतिशोध बिना अहां जानब कोना..

फतेह से अहां हमला जे कयलहुं
दिल्ली क ‘लेल लगेलहुं निशाना ,
सुदर्शन चक्र सऽ मारि गिरौलक
हरियाणे में ठोकलक हिंदक सेना..

चुटकी भरि सिंदूर के कीमत,
प्रतिशोध बिना अहां जानब कोना..

पहलगाम में पसरल मातम छल
धर्म देखि मारलक जन-जन छल,
घाटी में जेना तड़िपैत छल बहिना
आतंकी सभ तड़िपकऽ मरल ओहिना..

चुटकी भरि सिंदूर के कीमत,
प्रतिशोध बिना अहां जानब कोना..

काफ़िर शब्द नफरत भरल पढलहुं
दया धर्म मोन में कनियो नञ् पयलहुं,
कलमा नञ् पढ़ल त’ शिर गोली मारलहुं
महाकालक तांडव स आब बचब कोना..

चुटकी भरि सिंदूर के कीमत,
प्रतिशोध बिना अहां जानब कोना..

“मौलिक आ स्वरचित”
सर्वाधिकार सुरक्षित
© ® मनोज कर्ण
कटिहार ( बिहार )
तिथि – १०/०५/२०२५
वैशाख,शुक्ल पक्ष,त्रयोदशी तिथि,शनिवार
विक्रम संवत २०८२
मोबाइल न. – 8757227201
ईमेल पता – mk65ktr@gmail.com

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