तू गीत हैं मनमीत हैं मेरी संगीत हैं,
तू गीत हैं मनमीत हैं मेरी संगीत हैं,
प्यार भी तू, इश्क़ भी तू मेरी मोहब्बत भी तू हैं,
मैं जो भी लिखूं हर लेख में तू हैं,
मेरे लिए हंसना भी तू, रोना भी तू
मेरे हर मुस्कान,शरारत और खामोशी में तू ही तू हैं,
मैं क्या कहूं मेरे लिए कहना भी तू, सुनना भी तू
तेरे बिन मैं कहां मेरे लिए शून्य भी तू अनंत भी तू
जहां देखूं तू ही तू, हर नजर में तू मेरे नयन में तू ही तू हैं,
मेरे लिए पाना भी तू, खोना भी तू
मेरा सपना भी तू, ख्वाब भी तू
मेरी खुशबू भी तू, मेरा लिबास भी तू
अब क्या कहूं मेरे लिए प्रेम भी तू प्रेमिका भी तू
और प्रेमी भी तू ही तू हैं…
—- विवेक कुमार यादव