मरता है जब अपना, दुख पसरे अपार।
मरता है जब अपना, दुख पसरे अपार।
मरे जब दुश्मन कोई, फूटे खूब अनार।
यानी सबकी एक ही, है मंजिल पहचान
वतन रहा तो हम रहे, वरना कैसी शान।।
सूर्यकांत
मरता है जब अपना, दुख पसरे अपार।
मरे जब दुश्मन कोई, फूटे खूब अनार।
यानी सबकी एक ही, है मंजिल पहचान
वतन रहा तो हम रहे, वरना कैसी शान।।
सूर्यकांत