*मनः संवाद----*
मनः संवाद—-
10/05/2025
मन दण्डक — नव प्रस्तारित मात्रिक (38 मात्रा)
यति– (14,13,11) पदांत– Sl
बदला लेना होगा ही, निर्दोषों पर वार की, रखनी होगी लाज।
उबल रहा है खून यहाँ, बैठेंगे हम चुप नहीं, पूरी हो अब काज।।
आतंकी का ढेर करो, भारत के हम वीर हैं, जल थल नभ पर राज।
तेरी कश्ती डूब रही, मूरख पाकिस्तान तू, हुआ आज बेताज।।
अब दहाड़ सुन भारत का, गीदड़ धमकी दे रहा, सभी कहे लंगूर।
ठोंके गोली घर घुस कर, सँभलो पाकिस्तान अब, उजड़ा है सिंदूर।।
गंदे तेरे मंसूबे, दिखा दिए औकात हम, होगा तू बेनूर।
जाग उठी सेना अब तो, सीने में अंगार ले, होगा चकनाचूर।।
युद्ध करो बस युद्ध करो, उसका यही उपाय है, खत्म करो आतंक।
कभी कहीं उठ सके नहीं, उसे उखाड़ो जड़ सहित, भारत करो निशंक।।
आने वाले पुरखों तक, याद रहे ये युद्ध भी, ऐसा मारो डंक।
भारतीयता जिंदा कर, शौर्य दिखा तू युद्ध पर , बन बैरी हित कंक।।
— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य, (बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)
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