बाल कविता
पतंग
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अम्मा मुझे पतंग दिला दो,
मैं भी उसे उडाऊॅंगा।
आसमान में बड़ी दूर तक,
डोरी से पहुॅंचाऊॅंगा।।
लाला जी के उस ठेले पर,
देखो कितनी सारी हैं।
लाल गुलाबी नीली पीली,
देखो कितनी प्यारी हैं।।
हरी जामुनी काली भूरी,
ले जाओ इनसे खेलो।
जोर-जोर आवाज लगाते,
दस रुपया में दो लेलो।।
रामू राजू गोलू पिंकू,
सबको आज हराऊॅंगा।
पक्का मंज्झा मुझे दिला दो,
सबसे पैंच लड़ाऊॅंगा।।
~राजकुमार पाल (राज) ✍🏻
(स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित)